बिलासपुर में बीते कुछ दिनों से जारी तेज़ बारिश ने शहर की सामान्य ज़िंदगी को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। कुछ ही घंटों की मूसलाधार बारिश ने निचले इलाकों को पानी-पानी कर दिया। जहाँ एक ओर सड़कों पर वाहन फंसे नजर आए, वहीं दूसरी ओर घरों में गंदा नाला और बारिश का पानी भर गया। यह न केवल एक प्राकृतिक आपदा है, बल्कि शहर की आधारभूत सुविधाओं पर सवाल भी खड़ा करती है।
बारिश का असर:
लगातार हो रही बारिश ने शहर के बंधवापारा, चौबे कॉलोनी, इमलीभाठा, पुराना बस स्टैंड और जोरापारा जैसे क्षेत्रों को तालाब में बदल दिया। लोगों को घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया। बाइक और कारें सड़कों पर बहती नजर आईं। बारिश का पानी घरों में घुसने से लोगों को अपना घरेलू सामान ऊपर रखना पड़ा। कई घरों में तो दीवारें गिरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ।
जनजीवन पर प्रभाव:
स्कूल-कॉलेज बंद हो गए, बाजारों में सन्नाटा छा गया और दफ्तरों में उपस्थिति कम हो गई। बारिश की वजह से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों पर कीचड़ और गंदगी फैलने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य केंद्रों में बुखार और संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
प्रशासनिक लापरवाही:
बारिश से पहले नगर निगम द्वारा जल निकासी की कोई विशेष तैयारी नहीं की गई। कई जगहों पर नालों की सफाई अधूरी थी, जिससे पानी का निकास नहीं हो सका। लोग नगर निगम की इस लापरवाही से नाराज हैं। प्रशासन की राहत टीमें देर से पहुंची और राहत कार्य भी बेहद सीमित रहे। सोशल मीडिया पर लोगों ने पानी में फंसे बच्चों, वृद्धों और महिलाओं के वीडियो शेयर किए, जिससे हालात की गंभीरता सामने आई।
