छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में सरेंडर कर चुके नक्सलियों का मानसिक और सामाजिक बदलाव किया जा रहा है। नितारा प्रोग्राम और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की मदद से उन्हें थिएटर के जरिए संविधान, लोकतंत्र और कानून की जानकारी दी जा रही है।
कई ऐसे युवक-युवतियां हैं जिन्हें बचपन में ही नक्सली संगठन में शामिल कर लिया गया था। स्कूल और किताबों की जगह उन्हें जंगल, हथियार और हिंसा की जिंदगी मिली। अब वही लोग सफेद कुर्ता पहनकर ग्रामसभा, संसद और मंत्री-विधायक की भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशिक्षण में उन्हें अधिकार, कानून व्यवस्था और समाज में सामान्य जीवन जीने का तरीका सिखाया जा रहा है। अब तक 295 लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है, जबकि 134 लोगों का प्रशिक्षण जारी है।
इनमें कई ऐसे नक्सली भी शामिल हैं जिन पर 8 से 10 लाख रुपये तक का इनाम घोषित था और जो बड़े हमलों में शामिल रह चुके हैं। अब वे मुख्यधारा में लौटकर नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।
