July 21, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

“शराब कारोबार की आड़ में सत्ता का खेल: अनवर ढेबर ने रिश्तेदारों और कंपनियों के जरिए छिपाए 90 करोड़ रुपए”

छत्तीसगढ़ में सामने आया शराब घोटाला भारतीय राजनीति और प्रशासन में फैले गहरे भ्रष्टाचार की एक और मिसाल बनकर उभरा है। इस घोटाले में रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर की भूमिका केंद्र में है, जिन्हें इस अवैध कारोबार से 90 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई हुई। यह घोटाला न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर करता है।

व्यवस्थित वसूली तंत्र: पैसे के पीछे तैनात लोग

जांच एजेंसी ईडी (ED) के अनुसार, अनवर ढेबर ने शराब दुकानों से नकद वसूली के लिए एक पूरा नेटवर्क तैयार किया था। इस नेटवर्क में ‘सुब्बू’ और ‘विकास’ नामक दो व्यक्ति प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। इनका काम शराब दुकानों से पैसे इकट्ठा करना और अनवर तक सुरक्षित पहुंचाना था। यह प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की जाती थी, जिसमें अलग-अलग स्तरों पर लोग शामिल थे।

काले धन को सफेद करने की तरकीबें: फर्जी कंपनियां और रिश्तेदारों के नाम पर निवेश

घोटाले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अनवर ढेबर ने यह सारा पैसा अपने नाम पर नहीं रखा। इसके बजाय उसने अपने रिश्तेदारों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कई फर्जी कंपनियों के जरिए इसे निवेश किया। इस पैसे से कई संपत्तियां खरीदी गईं, शेयर बाजार में पैसा लगाया गया और कुछ रकम विदेशों में भी ट्रांसफर की गई होने की संभावना है। ये सभी कदम यह दिखाते हैं कि इस घोटाले को छुपाने के लिए वित्तीय धोखाधड़ी के अत्याधुनिक तरीकों का उपयोग किया गया।

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई: सत्ताधारी ताकतों पर शिकंजा

ईडी की जांच में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यह घोटाला केवल अनवर ढेबर तक सीमित नहीं है। इसमें कई अन्य प्रभावशाली लोग, अधिकारी और कारोबारी शामिल हो सकते हैं। अभी तक की छापेमारी में कई दस्तावेज, डिजिटल डेटा और बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। आने वाले समय में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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