September 7, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

नई रेलवे लाइन से पहले जमीनों की बंपर खरीद-फरोख्त, मुआवजे की उम्मीद में ग्रामीणों ने किए कई टुकड़े

छत्तीसगढ़ में खरोरा, मंदिर हसौद, आरंग और अभनपुर तहसीलों के 35 गांवों से होकर एक नई रेलवे लाइन गुजरने वाली है, जो खरसिया को नवा रायपुर और परमलकसा से जोड़ेगी। इस परियोजना की खबर फैलते ही इन गांवों में जमीनों की खरीद-बिक्री में जबरदस्त तेजी आ गई है। मुआवजे की उम्मीद में लोगों ने न सिर्फ जमीनें बेचीं, बल्कि कई मामलों में एक ही जमीन को कई टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्ट्री भी करवाई गई।जांच में सामने आया कि अधिकांश गांवों में जमीनों की स्थिति अचानक बदल दी गई है। कई किसानों ने अपनी जमीनें परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम दान पत्र के माध्यम से दर्ज करवा दीं, ताकि मुआवजे के समय अधिक लाभ मिल सके। लगभग छह साल पहले इस रेल लाइन का प्रस्ताव बना था, लेकिन अब जाकर जमीनों की खरीद-बिक्री बड़े स्तर पर देखने को मिल रही है।

अप्रैल महीने में प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। जमीनों की हेराफेरी और अवैध लेन-देन की आशंका को देखते हुए रेलवे विभाग ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है। इस पत्र में मांग की गई है कि जिन गांवों से रेलवे लाइन गुजरने वाली है, वहां जमीनों की खरीद-फरोख्त पर तत्काल रोक लगाई जाए।रेलवे के दक्षिण-पूर्व-मध्य जोन, बिलासपुर के उप मुख्य अभियंता ने यह चिट्ठी भेजी है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि भूमि अधिग्रहण से पहले जमीन की स्थिति में बदलाव को रोका जाए। यह कदम इसलिए ज़रूरी है ताकि मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अनियमितताओं से बचा जा सके।यह पूरा मामला यह दिखाता है कि किस तरह बड़ी परियोजनाओं से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों को लेकर हलचल शुरू हो जाती है। यदि प्रशासन समय रहते सख्ती नहीं बरतेगा, तो भविष्य में मुआवजा विवाद और कानूनी उलझनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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