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October 24, 2026
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छत्तीसगढ़

रायपुर मोजो मशरूम फैक्ट्री कांड: 4 ठेकेदारों पर FIR, नाबालिगों से 18 घंटे कराई मजदूरी, 97 मजदूरों का रेस्क्यू

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मोजो मशरूम फैक्ट्री में मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार का दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। चार ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है, जिन पर नाबालिगों समेत मजदूरों से 18 घंटे तक जबरन काम करवाने और मारपीट के गंभीर आरोप हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, और झारखंड के 97 मजदूरों को बंधक जैसी स्थिति से रेस्क्यू किया गया है। मजदूरों ने बताया कि खाना मांगने पर बच्चों को बेरहमी से पीटा जाता था और शौच के दौरान भी निगरानी रखी जाती थी।

कैसे उजागर हुआ मामला?

स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद रायपुर पुलिस और श्रम विभाग ने मोजो मशरूम फैक्ट्री पर छापा मारा। जांच में खुलासा हुआ कि फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों, जिनमें कई नाबालिग बच्चे शामिल थे, को अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया था। मजदूरों को 18 घंटे तक बिना रुके मशरूम उगाने का काम करना पड़ता था। एक रेस्क्यू किए गए मजदूर ने बताया, “हमें न खाना मिलता था, न पानी। बच्चों को खाना मांगने पर लाठियों से पीटा जाता था। भागने की कोशिश करने वालों को और सजा मिलती थी।”

रेस्क्यू ऑपरेशन और FIR

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 97 मजदूरों को सुरक्षित निकाला। इनमें से कई नाबालिग थे, जिन्हें शारीरिक और मानसिक यातना दी गई थी। चार ठेकेदारों के खिलाफ IPC की धारा 370 (मानव तस्करी), बाल श्रम निषेध अधिनियम, और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। रेस्क्यू किए गए मजदूरों को मेडिकल जांच और काउंसलिंग के लिए भेजा गया है।

मजदूरों की आपबीती

रेस्क्यू किए गए मजदूरों ने बताया कि उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जाती थी। एक महिला मजदूर नेව

प्रशासन की कार्रवाई

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फैक्ट्री के संचालकों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। रायपुर के SP ने कहा, “हमने ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है और मामले की गहन जांच की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” श्रम विभाग ने भी फैक्ट्री में नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू कर दी है और मजदूरों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की है।

सामाजिक संगठनों का गुस्सा

इस घटना ने सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में आक्रोश पैदा किया है। एक्टिविस्ट रमेश साहू ने कहा, “यह मामला श्रमिकों और नाबालिगों के साथ क्रूरता की हद को दर्शाता है। ऐसी फैक्ट्रियों पर नियमित निरीक्षण और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।”

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