छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई स्थित निवास पर सुबह-सुबह छापेमारी की। यह कार्रवाई शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई, जिसमें ED पहले से जांच कर रही थी। अधिकारियों के साथ भारी संख्या में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी मौजूद रहे, जिससे पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
छापे की शुरुआत सुबह 6 बजे हुई। ED की टीम भिलाई के पद्मनगर इलाके में स्थित बघेल के घर पहुंची और आसपास के रास्तों को पूरी तरह से सील कर दिया गया। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ भिलाई और दुर्ग जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर खुद इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा— “ED आ गई। आज विधानसभा का अंतिम दिन है और मैं अडानी के लिए तमन्नार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा उठाने वाला था। लेकिन ‘साहब’ ने ED भेज दी।” इस बयान ने साफ कर दिया कि वह इसे राजनीतिक साजिश मानते हैं।
शराब घोटाले के इस मामले में पहले से ही कई व्यापारियों और अधिकारियों के नाम सामने आ चुके हैं। अब ED की नजर भूपेश बघेल और उनके सहयोगियों पर है। सूत्रों के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मिले सुरागों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
इस छापेमारी ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। विपक्ष इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र चल रहा है और इसी बीच यह छापा नई बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले समय में यह कार्रवाई क्या नया मोड़ लेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
