उत्तराखंड के धार्मिक नगर हरिद्वार में रविवार की सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक बेकाबू हो गई। सावन के पवित्र महीने में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचे थे। भीड़ की तीव्रता ऐसी थी कि थोड़ी सी चूक भगदड़ का कारण बन गई, जिसमें 6 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
घटना के समय मंदिर परिसर में कोई स्पष्ट भीड़ प्रबंधन योजना नजर नहीं आई। कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि प्रशासन को संभलने का मौका नहीं मिला। यह हादसा तब हुआ जब श्रद्धालु दर्शन के लिए लाइन में लगे हुए थे और किसी एक स्थान पर फिसलन या धक्का-मुक्की के कारण भगदड़ की स्थिति बन गई।
हादसे के बाद राहत कार्य तुरंत शुरू किया गया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों की पहचान की जा रही है और उनके परिजनों को प्रशासन द्वारा मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण की गंभीर आवश्यकता पर भी सवाल खड़े करती है। हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थानों पर, खासकर त्योहारी मौसम में, भीड़ प्रबंधन की मजबूत योजना और पर्याप्त सुरक्षा बल की मौजूदगी बेहद जरूरी है। साथ ही, आम श्रद्धालुओं को भी धैर्य और अनुशासन का पालन करना चाहिए ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सके।
