बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों पर राजनीति फिर तेज हो गई है। जैसे-जैसे NDA गठबंधन की बढ़त पक्की होती दिख रही है, कांग्रेस और कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने हार के लिए SIR फॉर्म में गड़बड़ी और EVM की विश्वसनीयता को मुख्य वजह बताया है।
इसी बीच, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी गंभीर टिप्पणी करते हुए चुनाव आयोग की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया। उनका दावा है कि विभिन्न राज्यों में लगातार उच्च जीत प्रतिशत एक ही पैटर्न की ओर इशारा करता है, जिस पर विस्तृत जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कई ऐसे पहलू हैं जिन पर जनता को पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि लाखों वोट काटे गए, कुछ इलाकों में नाम हटाए गए और कई जगह प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं ने भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि गरीब, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के वोट प्रभावित हुए, जो चुनाव नतीजों पर गहरी छाप छोड़ सकते हैं।
वहीं, दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक पार्टीवार आंकड़े बताते हैं कि NDA आरामदायक स्थिति में आगे है। बीजेपी और उसके सहयोगी दल 200 से अधिक सीटों के आंकड़े को पार करते नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह पूरा मामला अब सिर्फ जीत-हार से बड़ा होकर चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वास पर चर्चा का विषय बन गया है।
