April 17, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

खाद की भारी किल्लत से जूझते किसान, सड़कों पर उतरा आक्रोश

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यदि किसानों को खेती के बुनियादी संसाधन जैसे बीज और खाद ही समय पर न मिलें, तो यह न केवल उनकी आजीविका के लिए बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरे की घंटी है। बालोद ज़िले में खाद की किल्लत ने किसानों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रशासन से थक चुके किसानों ने अब विरोध का रास्ता चुना है।

मुख्य समस्या:

28 जुलाई 2025 को बालोद जिले के 14 गांवों के सैकड़ों किसान राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर कुसुमकसा गांव के पास धरने पर बैठ गए। उन्होंने सड़क को जाम कर दिया, जिससे राजनांदगांव-बालोद-भानुप्रतापपुर मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। यह प्रदर्शन सिर्फ खाद की मांग को लेकर नहीं था, बल्कि वर्षों की उपेक्षा और अनसुनी मांगों का परिणाम था।

किसानों की व्यथा:

किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को खाद की कमी के बारे में सूचित किया था। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद केवल आश्वासन मिले, जबकि खेतों में समय पर खाद न पहुंचने से धान की बुआई रुक गई है। खाद न मिलने की वजह से उनकी फसलें सूखने लगी हैं और उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, सरकारी गोदाम खाली पड़े हैं और निजी दुकानों में कालाबाजारी बढ़ रही है।

प्रशासन की भूमिका:

किसानों का यह भी कहना है कि प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। केवल निरीक्षण और वादों से उन्हें बहलाया गया। नतीजतन, उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर बैठ कर विरोध दर्ज करवाने का निर्णय लिया।

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