छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2025 को एक सराहनीय निर्णय लेते हुए बिलासपुर के तीन अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) के रूप में नामित किया है। यह निर्णय न्याय क्षेत्र में अनुभव और योग्यता को सम्मान देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
मुख्य विवरण:
जिन अधिवक्ताओं को यह मान्यता दी गई है, उनके नाम हैं – अशोक वर्मा, मनोज परांजपे, और सुनील ओटवानी। यह तीनों अधिवक्ता लंबे समय से बिलासपुर हाईकोर्ट में अपनी सेवाएं दे रहे थे और विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों में अपनी दक्षता साबित कर चुके हैं। उच्च न्यायालय ने उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में डेजीनेट किया है।
महत्त्व और प्रभाव:
वरिष्ठ अधिवक्ता की पदवी एक प्रकार का प्रतिष्ठित दर्जा होती है, जो अनुभव, ज्ञान और आचरण के आधार पर दी जाती है। इससे न केवल संबंधित अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा बढ़ती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में उनका योगदान और भी प्रभावशाली हो जाता है। यह पदवी अन्य अधिवक्ताओं को भी प्रेरित करती है कि वे अपनी योग्यता और ईमानदारी से कार्य करें।
