लोकतंत्र में कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, लेकिन जब सत्ता और प्रभाव का गलत इस्तेमाल होता है, तो यह व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में हाल ही में हुई घटना इसी तरह की एक मिसाल है, जिसमें एक मंत्री का रिश्तेदार कानून को ताक पर रखकर हिंसक वारदात में शामिल पाया गया।
घटना का विवरण:
13 अगस्त 2025 को बलौदाबाजार में राज्य के मंत्री टंक राम वर्मा के भतीजे राजा वर्मा ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक पेट्रोल पंप कर्मचारी की बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि बेल्ट और डंडों से पीटने के कारण कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना से क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया और लोग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे।
पुलिस की भूमिका और आरोप:
मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे कि उन्होंने प्रारंभ में FIR दर्ज करने से इनकार किया और आरोपी को बचाने की कोशिश की। यह तब तक चलता रहा जब तक कि मीडिया ने हस्तक्षेप कर मामले को उजागर नहीं किया। मीडिया के दबाव के बाद ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जिससे उनकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग गए।
मीडिया का हस्तक्षेप:
इस मामले में मीडिया ने एक बार फिर अपनी ताकत साबित की। समय रहते खबर फैलाने और जनदबाव बनाने के कारण FIR दर्ज हुई और मामले में आगे की जांच शुरू हुई। यह बताता है कि जब प्रशासन चुप हो जाता है, तब मीडिया की आवाज जनता की उम्मीद बनती है।
