सूरजपुर जिले के प्रेमनगर ब्लॉक में भ्रष्टाचार की एक और परत तब खुल गई जब ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के एक एसडीओ को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह मामला न सिर्फ विभागीय व्यवस्थाओं की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक किसान अपनी मेहनत के हक़ के लिए किस हद तक संघर्ष करने को मजबूर हो जाता है।
ग्राम नवापारा खुर्द के किसान की जमीन पर मछली पालन योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण का कार्य कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती थी जब तालाब का मूल्यांकन एसडीओ द्वारा किया जाता। लेकिन मूल्यांकन के नाम पर एसडीओ महीनों से फाइल को अटका कर बैठा था। किसान बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाता रहा, मगर हर बार उसे बहाना सुनाया जाता।
आखिरकार मामला तब बिगड़ा जब एसडीओ ने मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करने के बदले किसान से 15,000 रुपये की रिश्वत मांगी। यह सुनकर किसान ने घुटने टेकने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने का फैसला किया। उसने पूरे मामले की शिकायत सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो को कर दी।
शिकायत की पुष्टि होते ही एसीबी ने पूरी कार्रवाई की योजना बनाई। तय दिन किसान अपने घर पर रकम लेकर पहुंचा और कुछ ही देर बाद एसडीओ भी रिश्वत लेने वहां पहुंच गया। जैसे ही एसडीओ ने नोटों को हाथ में लिया, पास ही छिपी एसीबी की टीम ने उसे तत्काल दबोच लिया। अधिकारी की जेब से बरामद रिश्वत राशि पूरे मामले की सच्चाई बयान कर रही थी।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने आगे की जांच शुरू कर दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार एसडीओ की चल-अचल संपत्तियों की भी जांच होगी ताकि भ्रष्टाचार की गहराई को समझा जा सके। इस कार्रवाई ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है और किसान समुदाय में राहत की भावना दिखाई दे रही है।
यह घटना बताती है कि व्यवस्था में मौजूद भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए जागरूक नागरिकों का साहस और कानून का कड़ा रुख दोनों एक साथ जरूरी हैं। किसान की चतुराई और दृढ़ता ने न सिर्फ उसका हक वापस दिलाया, बल्कि भ्रष्ट अधिकारी को भी कानून के शिकंजे में ला खड़ा किया।
