न्यायपालिका का मुख्य उद्देश्य है जनता को समय पर और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना। लेकिन लंबित मामलों की अधिकता के कारण अक्सर न्याय में देरी होती है। इस स्थिति से निपटने के लिए लोक अदालत की व्यवस्था की गई, जो समझौता और सुलह के आधार पर मामलों का निपटारा करती है। छिंदवाड़ा में आयोजित हालिया नेशनल लोक अदालत इसका सशक्त उदाहरण है।
मुख्य विवरण
छिंदवाड़ा में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 39 खंडपीठों का गठन किया गया, जहां विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई हुई। कुल 948 प्रकरणों का निपटारा इस आयोजन में किया गया। खास बात यह रही कि इन मामलों में 11.15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के अवॉर्ड पारित किए गए।
महत्व और प्रभाव
इस लोक अदालत ने दिखा दिया कि समझौता और बातचीत से जटिल विवाद भी आसानी से सुलझाए जा सकते हैं।
इससे न केवल अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम हुआ, बल्कि पीड़ित पक्षों को शीघ्र न्याय भी मिला।
करोड़ों रुपये की राशि के निपटारे ने आर्थिक दृष्टि से भी लोगों को राहत दी।
जनता का न्यायपालिका में विश्वास और भी मजबूत हुआ।
