मध्यप्रदेश की राजनीति में परिवारवाद का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताज़ा रिपोर्ट ने यह साफ किया कि प्रदेश के कुल 57 सांसद और विधायक ऐसे हैं जिनका राजनीति से पारिवारिक रिश्ता जुड़ा है। इनमें से सबसे अधिक 28 नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से और 20 कांग्रेस से जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि कुल 270 नेताओं का विश्लेषण करने के बाद यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश की राजनीति में परिवारवाद का दखल गहरा है। कई नेताओं के परिजन या तो विधायक और सांसद रह चुके हैं या फिर सक्रिय राजनीति में भूमिका निभा रहे हैं।
परिवारवाद को लेकर हमेशा बहस होती रही है। आलोचकों का मानना है कि यह परंपरा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है क्योंकि इससे नए और योग्य नेताओं को अवसर नहीं मिल पाता। दूसरी ओर, समर्थकों का कहना है कि राजनीतिक परिवारों में जन्म लेने वाले व्यक्ति राजनीति की बारीकियां बचपन से सीख लेते हैं और जनता से जुड़ने की क्षमता भी उनमें अधिक होती है।
मध्यप्रदेश की यह रिपोर्ट एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि लोकतंत्र में नेतृत्व का आधार योग्यता और जनसेवा होना चाहिए या फिर पारिवारिक पृष्ठभूमि। यह बहस आने वाले समय में और भी तीव्र हो सकती है, खासकर चुनावी माहौल में।
