रायपुर/बिलासपुर/दुर्ग. ट्रैफिक पुलिस या परिवहन विभाग की ओर से भेजे गए ई-चालान के मैसेज ने लोगों को सतर्क कर दिया है। बिलासपुर और दुर्ग के पार्षदों तथा रायपुर के एक कारोबारी को 10 लाख रुपये से अधिक की ठगी का सामना करना पड़ा है। साइबर ठग ऐसे मैसेज भेजकर खातों को खाली कर रहे हैं, दावा पुलिस कार्यालयों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने किया है।
मामला क्या है?
फर्जी चालान (ई-चालान) के नाम पर SMS या व्हाट्सएप मैसेज भेजे जाते हैं। मैसेज में “चालान कटा है”, “अभी भुगतान करें नहीं तो जुर्माना बढ़ेगा” जैसे धमकी भरे शब्द होते हैं। लिंक इस तरह का होता है कि दिखने में असली सरकारी पोर्टल जैसा लगे। लेकिन लिंक पर क्लिक करने पर मोबाइल/लैपटॉप में फर्जी वेबसाइट खुलती है जहाँ बैंक डिटेल, OTP आदि मांगे जाते हैं। कभी-कभी APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जो मालवेयर के रूप में काम करती है और बैंक खाते से पैसे निकालने में सक्षम होती है।
असली और फर्जी ई-चालान में फर्क कैसे करें
- पता लगाने की कसौटी विशेषताएँ अगर असली हो संकेत अगर फर्जी हो सकता है
उपयुक्त डोमेन नाम सरकारी डोमेन हो जैसे echallan.parivahan.gov.in अथवा राज्य परिवहन विभाग का .gov.in वाला लिंक। मिलते-जुलते नाम (URL) जैसे .org, .net, किसी अनजान/फर्जी उपडोमेन, स्पेलिंग में बदलाव, अतिरिक्त शब्द आदि। - SMS/लिंक का माध्यम और हैडर एसएमएस आमतौर पर वाहन पंजीकरण नंबर, उल्लंघन विवरण, चालान नंबर आदि स्पष्ट होंगे। हैडर “VAAHAN” जैसा आधिकारिक हो सकता है। मैसेज वॉट्सएप या किसी अनजान स्रोत से आएँ, अनौपचारिक भाषा, गलत व्याकरण/शब्द।
- भुगतान/डेटा माँगने का तरीका यदि असली हो, तो वो लिंक आपको आधिकारिक पोर्टल पर ले जाए और बैंक/पर्सनल डिटेल आदि सुरक्षित तरीके से मांगे जाएँ; OTP आदि केवल तभी जब सुरक्षा कारण हो। आपका बैंक विवरण, OTP, पिन आदि “अभी देना है नहीं तो जुर्माना बढ़ जाएगा” जैसी धमकी या दबाव; APK फाइल डाउनलोड करने का आग्रह।
सावधानी के उपाय
किसी भी चालान मैसेज पर प्राप्त लिंक पर क्लिक करने से पहले सरकारी पोर्टल पर जाकर चालान का स्टेटस चेक करें।
- OTP, बैंक डिटेल, UPI पिन आदि किसी भी असमर्थित लिंक पर न दें।
- किसी भी अज्ञात एप्लिकेशन (APK) को डाउनलोड न करें। सिनेप्टैचरित ऐप स्टोर या प्ले स्टोर से ही एप डाउनलोड करें।
