April 17, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

शिक्षाकर्मी पदोन्नति केस में हाईकोर्ट की बड़ी बहस: छह अहम सवालों पर टिकी शिक्षकों की उम्मीदें, गुरुवार को होगी अगली सुनवाई

छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों की पदोन्नति और वेतनमान से जुड़ा बहुचर्चित मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। हाईकोर्ट में सोमवार, 3 नवंबर से इस केस की सुनवाई शुरू हुई, जो मंगलवार को भी देर शाम तक जारी रही। न्यायमूर्ति एन.के. व्यास की सिंगल बेंच इस ऐतिहासिक मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को करेगी। यह अब तक का सबसे बड़ा केस माना जा रहा है, जिसमें एक साथ 1020 याचिकाओं की सुनवाई हो रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने छह महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा केंद्रित की है, जिनके आधार पर शिक्षाकर्मियों की वरिष्ठता, ग्रेडेशन सूची और क्रमोन्नति (Promotion) से जुड़ी कई उलझनों का हल निकल सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन छह सवालों के जवाब ही आगे की दिशा तय करेंगे।

पहला सवाल इस बात से जुड़ा है कि क्या शिक्षाकर्मी अपने अस्तित्व काल में “सरकारी कर्मचारी” की परिभाषा में आते थे या नहीं। दूसरा बड़ा प्रश्न यह है कि क्या पंचायत कर्मियों को राज्य कर्मचारी के समान माना जा सकता है। तीसरा बिंदु 10 मार्च 2017 के शासनादेश से संबंधित है — क्या यह आदेश पूर्व शिक्षाकर्मियों (ग्रेड I, II, III) पर लागू होता है या नहीं।

इसके अलावा, चौथा प्रश्न यह है कि WPS 3369/2021 केस का प्रभाव मौजूदा याचिकाओं पर पड़ेगा या नहीं। पाँचवां सवाल इस बात पर केंद्रित है कि क्या पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की गई याचिकाओं का असर वर्तमान मामलों पर होगा। छठा और सबसे अहम प्रश्न यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज करते समय छोड़े गए खुले बिंदुओं (open points) पर क्या सिंगल बेंच दोबारा सुनवाई कर सकती है।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने जोरदार पक्ष रखा। अदालत ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई में लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति एन.के. व्यास ने कहा कि इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर मिलने पर राज्य सरकार और शिक्षाकर्मियों दोनों के लिए आगे का रास्ता साफ हो जाएगा।

यह मामला शिक्षाकर्मियों के भविष्य से सीधा जुड़ा है। निर्णय आने के बाद न केवल उनकी वरिष्ठता और ग्रेडेशन सूची में बड़ा बदलाव संभव है, बल्कि यह फैसला राज्यभर के शिक्षकों की पदोन्नति नीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

 

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