केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसके साथ ही देशभर के राजभवन अब ‘लोकभवन’ और केंद्रीय सचिवालय का नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार सत्ता से सेवा की ओर बढ़ने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है और यह बदलाव प्रशासनिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक परिवर्तन है।
बदलाव क्यों किए गए?
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘राजभवन’ शब्द औपनिवेशिक मानसिकता से जुड़ा है।राज्यपाल सम्मेलन में यह सुझाव आया कि इसे बदला जाए, जिसके बाद नाम लोकभवन और राज्यपाल/उप-राज्यपाल के आवास का नाम लोकनिवास किया गया।
PMO का शिफ्ट — नया एडवांस कैंपस
78 साल पुरानी साउथ ब्लॉक इमारत से PMO अब नई सेवा तीर्थ नामक आधुनिक इमारत में शिफ्ट होगा।
यह बदलाव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है।
यहां तीन अलग-अलग सेवा तीर्थ कैंपस होंगे—
- सेवा तीर्थ-1: PMO
- सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
- सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय
14 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन यहां उच्चस्तरीय बैठक कर चुके हैं।
कर्तव्य पथ का नया प्रशासनिक ज़ोन
पूर्व राजपथ (अब कर्तव्य पथ) के तीन किलोमीटर क्षेत्र को आधुनिक, पैदल चलने योग्य और सरकारी ज़ोन में विकसित किया जा रहा है।इसका सबसे बड़ा हिस्सा है नया कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS), जिसे अब कर्तव्य भवन नाम दिया गया है।
यहां 10 नए ऑफिस ब्लॉक तैयार किए गए हैं, जिनमें वे मंत्रालय शिफ्ट होंगे जो अभी शास्त्री भवन, निर्माण भवन और कृषि भवन जैसी पुरानी इमारतों में फैले हैं।
नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का भविष्य
ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को बदला जाएगा—
दोनों भवन आगे चलकर “युग-युगीन भारत संग्रहालय” बनेंगे।इसके लिए फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसियों से समझौता हुआ है।
सरकार की मंशा
PMO के अनुसार, यह बदलाव सिर्फ नाम बदलने के लिए नहीं है, बल्कि भारत की प्रशासनिक संस्कृति को औपनिवेशिक ढाँचे से भारतीय मूल्यों की ओर ले जाने का प्रयास है।
