राजनांदगांव जिले में अवैध धान की खरीद-बिक्री और भंडारण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए लगातार कार्रवाई तेज कर दी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक राजस्व, खाद्य और मंडी विभाग की संयुक्त टीमों ने व्यापक जांच अभियान चलाकर बड़े पैमाने पर अवैध धान जब्त किया है। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराज्यीय अवैध धान आवक पर रोक लगाना और सरकारी खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक जिले में कुल 174 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 7 करोड़ 48 लाख 63 हजार 326 रुपये मूल्य का 24,149.46 क्विंटल धान (60,374 बोरा) जब्त किया गया है। इसके साथ ही अवैध परिवहन में प्रयुक्त 17 वाहनों को भी सीज किया गया है।
अनुविभागवार कार्रवाई की बात करें तो राजनांदगांव अनुविभाग में 77 प्रकरणों में 4 करोड़ 46 लाख 2 हजार 800 रुपये मूल्य का 14,388 क्विंटल धान (35,970 बोरा) जब्त किया गया, वहीं 7 वाहन भी जप्त किए गए। डोंगरगढ़ अनुविभाग में 47 प्रकरणों में 1 करोड़ 32 लाख 16 हजार 106 रुपये मूल्य का 4,263.26 क्विंटल धान (10,658 बोरा) और 2 वाहन जब्त किए गए। इसी तरह डोंगरगांव अनुविभाग में 50 प्रकरणों में 1 करोड़ 70 लाख 44 हजार 420 रुपये मूल्य का 5,498.20 क्विंटल धान (13,746 बोरा) तथा 8 वाहन जप्त किए गए।
हालिया कार्रवाई में भी प्रशासन ने कोचियों और बिचौलियों पर सख्ती दिखाई है। संयुक्त जांच दल ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कुछ ही प्रकरणों में 75 लाख रुपये से अधिक मूल्य का अवैध धान बरामद किया। इन कार्रवाइयों से जिले में अवैध धान कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रशासन ने जिले के करीब 1500 छोटे-बड़े मंडी अनुज्ञाधारियों को सूचीबद्ध कर जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। साथ ही अंतरराज्यीय अवैध धान की आवक रोकने के लिए बोरतलाब, पाटेकोहरा और कल्लूबंजारी क्षेत्र में तीन अंतरराज्यीय चेकपोस्ट भी स्थापित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
