ग्वालियर और मुरैना से जुड़ा यह मामला एक प्रेम संबंध, पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव की दर्दनाक कहानी बयां करता है। हाईकोर्ट के वकील मृत्यंजय सिंह चौहान द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने न केवल कानून जगत को झकझोर दिया है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि मृत्यंजय सिंह अपने जीवन के अंतिम दिनों में गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उनके कमरे से शहीद भगत सिंह की प्रसिद्ध पुस्तक ‘जेल डायरी’ बरामद हुई, जो उनके विचारों और मनःस्थिति की ओर इशारा करती है। माना जा रहा है कि आत्महत्या से पहले वे इस किताब को पढ़ रहे थे। पुस्तक में आज़ादी, मुक्ति और बलिदान जैसे विचार दर्ज हैं, जो संभवतः उनके मन में चल रहे द्वंद्व को दर्शाते हैं।
परिजनों के अनुसार, मृत्यंजय सिंह का पिछले करीब पांच वर्षों से मुरैना की एक सब इंस्पेक्टर युवती के साथ प्रेम संबंध था। परिवार ने यह भी बताया कि 30 दिसंबर को दोनों की शादी तय थी। इसी सिलसिले में मृत्यंजय 12 दिसंबर को अपनी प्रेमिका से मिलने मुरैना स्थित सरकारी क्वार्टर पहुंचे थे। आमतौर पर वे हर सप्ताह उससे मिलने जाते थे, लेकिन इस बार अचानक पहुंचने पर स्थिति बिगड़ गई।
बताया जा रहा है कि जब मृत्यंजय वहां पहुंचे तो प्रेमिका अपने कमरे में एक आरक्षक के साथ मौजूद थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जो बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया। इस घटना ने मृत्यंजय को मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया। प्रेम में विश्वास टूटने और सामाजिक दबाव के चलते वे अंदर ही अंदर टूटते चले गए।
जानकारी के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद मृत्यंजय सिंह चौहान ने 15 दिसंबर को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अगले दिन डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव को लेकर सबसे पहले ग्वालियर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां मृतक के बड़े भाई ने उनके पार्थिव शरीर के दर्शन किए। यह एक असामान्य दृश्य था, जिसने सभी को भावुक कर दिया।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की आत्महत्या नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में बढ़ते तनाव, मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और भावनात्मक सहारे की कमी को भी उजागर करता है। अब पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके और यह समझा जा सके कि किन परिस्थितियों ने एक पढ़े-लिखे वकील को यह आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
