प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जय कॉर्प लिमिटेड के निदेशक आनंद जयकुमार जैन से जुड़े लगभग ₹2,434 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी मामले में देशभर में व्यापक छापेमारी की है। इस कार्रवाई के तहत रायपुर, मुंबई, नासिक और बेंगलुरु समेत कई शहरों में 30 से अधिक ठिकानों पर ED की टीम ने एक साथ दबिश दी। छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड्स और वित्तीय लेन-देन से जुड़े सबूतों की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोप है कि आनंद जैन और उनसे जुड़ी कंपनियों ने रियल एस्टेट और SEZ परियोजनाओं के नाम पर निवेशकों और बैंकों से भारी रकम जुटाई। मुंबई SEZ प्राइवेट लिमिटेड और नवी मुंबई SEZ के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का बैंक कर्ज लिया गया, लेकिन इस राशि का इस्तेमाल घोषित उद्देश्यों के बजाय अन्य वित्तीय गतिविधियों में किया गया।
CBI की FIR के मुताबिक, यह पैसा कथित आपराधिक साजिश के तहत मॉरीशस और जर्सी (Channel Islands) स्थित विदेशी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। आरोप यह भी है कि नवंबर 2007 के दौरान इस धन का उपयोग रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स की फ्यूचर ट्रेडिंग में किया गया। इससे न केवल निवेशकों को नुकसान हुआ, बल्कि बैंकिंग सिस्टम के साथ भी धोखाधड़ी की गई।
इस पूरे मामले में CBI ने बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर FIR दर्ज की थी और जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया। इससे पहले मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को भी इस केस से जुड़ी शिकायतें मिल चुकी थीं। FIR के अनुसार, मई 2006 से जून 2008 के बीच दो कंपनियां बनाकर निवेशकों से करीब ₹2,434 करोड़ की राशि जुटाई गई।
ED को आशंका है कि रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के नाम पर जुटाया गया पैसा शेल कंपनियों और ऑफशोर अकाउंट्स के जरिए इधर-उधर किया गया। एजेंसी अब संदिग्ध ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और आने वाले समय में इस केस में कई और बड़ी कंपनियों व कारोबारी समूहों की भूमिका सामने आ सकती है।
