April 18, 2026
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महिला क्रिकेट में ऐतिहासिक फैसला: BCCI ने घरेलू मैच फीस में बड़ी बढ़ोतरी की, पुरुष खिलाड़ियों के बराबर भुगतान लागू

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने महिला क्रिकेट के इतिहास में एक अहम और दूरगामी फैसला लेते हुए घरेलू क्रिकेट में महिला खिलाड़ियों की मैच फीस में बड़ी बढ़ोतरी की है। इस फैसले के तहत अब महिला क्रिकेटरों को घरेलू मुकाबलों में पुरुष खिलाड़ियों के बराबर मैच फीस दी जाएगी। यह निर्णय 22 दिसंबर को आयोजित बीसीसीआई की ऑनलाइन बैठक में लिया गया, जिसे महिला क्रिकेट के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

नए फैसले के अनुसार, फर्स्ट क्लास और वनडे मुकाबलों में प्लेइंग-11 का हिस्सा रहने वाली महिला खिलाड़ियों को प्रति मैच 50 हजार रुपये मिलेंगे, जबकि प्लेइंग-11 से बाहर रहने वाली खिलाड़ियों को 25 हजार रुपये दिए जाएंगे। वहीं, टी-20 मैचों में प्लेइंग-11 में शामिल खिलाड़ियों को 25 हजार रुपये और बेंच पर बैठने वाली खिलाड़ियों को 12,500 रुपये प्रति मैच मिलेंगे। इससे पहले इन सभी श्रेणियों में महिला खिलाड़ियों को काफी कम राशि दी जाती थी।

बीसीसीआई के इस निर्णय से घरेलू महिला क्रिकेट खेलने वाली सीनियर खिलाड़ियों की वार्षिक कमाई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। जहां पहले एक घरेलू सीजन में महिला खिलाड़ियों को औसतन लगभग 2 लाख रुपये मिलते थे, वहीं अब मैचों की संख्या और बढ़ी हुई फीस के चलते एक सीजन में 5 से 7 लाख रुपये तक की कमाई संभव हो सकेगी। इससे महिला खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ क्रिकेट को करियर के रूप में अपनाने का बेहतर अवसर मिलेगा।

सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि मैच अधिकारियों को भी इस फैसले का लाभ मिलेगा। बीसीसीआई ने महिला क्रिकेट में अंपायरों और रेफरी की फीस बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। लीग स्टेज के मैचों में अंपायरों को अब 40 हजार रुपये प्रति दिन मिलेंगे, जबकि नॉकआउट मुकाबलों में यह राशि बढ़कर 50 से 60 हजार रुपये तक होगी। साथ ही, देश के 79 मैच रेफरी की फीस भी अंपायरों के बराबर तय की गई है।

इसके अलावा, जूनियर महिला क्रिकेटरों की मैच फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। स्टेट और जोनल टीमों से खेलने वाली जूनियर खिलाड़ियों को अब घरेलू टूर्नामेंट में अधिक भुगतान मिलेगा, जिससे जमीनी स्तर पर महिला क्रिकेट को मजबूती मिलेगी और भविष्य के लिए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा।

बीसीसीआई का यह कदम न सिर्फ लैंगिक समानता की दिशा में मजबूत संदेश देता है, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट को आर्थिक, पेशेवर और संरचनात्मक रूप से नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता भी रखता है।

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