April 18, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

कांगेर घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की कवायद तेज, फरवरी में यूनेस्को ले सकता है अंतिम फैसला

रायपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल के तहत यूनेस्को (UNESCO) को भेजी गई विस्तृत डोजियर, वैज्ञानिक रिपोर्ट और संरक्षण प्रबंधन योजना पर अंतिम समीक्षा चल रही है। सूत्रों के अनुसार फरवरी में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

तदर्थ सूची से स्थायी सूची तक का सफर

कांगेर घाटी को पहले ही यूनेस्को की टेंटेटिव (तदर्थ) लिस्ट में शामिल किया जा चुका है। यह छत्तीसगढ़ का पहला प्राकृतिक स्थल है, जिसे इस प्रारंभिक सूची में जगह मिली। अब अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण इसे स्थायी विश्व धरोहर सूची में शामिल कराना है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

क्यों खास है कांगेर घाटी?

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान लगभग 200 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यह बस्तर अंचल की जैव विविधता का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां:

  • घने साल और मिश्रित वन पाए जाते हैं
  • कोटमसर, कैलाश और दंडक जैसी प्राचीन चूना-पत्थर की गुफाएं हैं
  • दुर्लभ वन्य प्रजातियां और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है

यूनेस्को के मानदंडों के अनुसार यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, भू-आकृतिक संरचना और जैव-विविधता—तीनों ही दृष्टि से वैश्विक महत्व रखता है।

सरकार की तैयारी और संरक्षण योजना

राज्य सरकार ने कांगेर घाटी के लिए विशेष संरक्षण और प्रबंधन योजना तैयार की है। इसमें नियंत्रित पर्यटन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यूनेस्को की शर्तों के अनुसार मानव हस्तक्षेप को सीमित रखते हुए विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाएगा।

दर्जा मिलने से क्या होंगे फायदे?

अगर कांगेर घाटी को विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो:

  • छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी
  • पर्यटन में बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा
  • संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय फंड और तकनीकी सहयोग उपलब्ध होगा
  • बस्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को वैश्विक मंच मिलेगा

फरवरी पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजरें फरवरी में होने वाली यूनेस्को की बैठक पर टिकी हैं। सकारात्मक निर्णय आने पर कांगेर घाटी न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बनेगी और भारत की प्राकृतिक धरोहरों की सूची में एक और अनमोल रत्न जुड़ जाएगा।

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