छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपराध की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। वर्ष 2025 के अपराध आंकड़े बताते हैं कि शहर में कुल 15,896 अपराध दर्ज किए गए, जो बीते वर्षों की तुलना में गंभीर संकेत देते हैं। खासतौर पर महिलाओं के खिलाफ अपराध और हत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, एक साल में 280 रेप के मामले दर्ज हुए, जबकि 92 लोगों की हत्या हुई। यानी औसतन हर दो दिन में एक दुष्कर्म और हर चार दिन में एक हत्या की घटना सामने आई। यह स्थिति बताती है कि मामूली विवाद भी अब जानलेवा रूप ले रहे हैं। मोबाइल चलाने, ठंडा भजिया लाने या साथ चलने से मना करने जैसे छोटे-छोटे कारणों पर हत्या तक की घटनाएं सामने आई हैं।
तीन वर्षों के अपराध आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट है कि अपराध में निरंतर वृद्धि हुई है। शहर में 543 चाकूबाजी की घटनाएं दर्ज की गईं, जो युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती हैं। थाना क्षेत्रवार आंकड़ों में खमतराई थाना सबसे अधिक अपराध दर्ज होने वाला क्षेत्र रहा, जहां 1013 FIR दर्ज की गईं।
पुलिस प्रशासन का दावा है कि अपराध नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। बीते वर्ष में विभिन्न मामलों में 445 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और 100 से अधिक अपराधियों को कड़ी सजा दिलाई गई। इसके अलावा नशे के कारोबार पर भी बड़ा प्रहार किया गया और कई नारकोटिक्स नेटवर्क ध्वस्त किए गए।
यातायात व्यवस्था के मोर्चे पर भी सख्ती बढ़ाई गई। वर्ष 2025 में पिछले साल की तुलना में ई-चालान की कार्रवाई 50 प्रतिशत तक बढ़ी, ताकि सड़क हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। बड़े आयोजनों, त्योहारों और प्रदर्शनों के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे उन अवसरों पर कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।
हालांकि, अपराध को लेकर सियासी बयानबाज़ी भी तेज रही। विपक्ष का आरोप है कि पिछले वर्षों की तुलना में हजारों FIR ज्यादा दर्ज हुई हैं, जो यह दर्शाता है कि अपराध घटने का दावा वास्तविकता से परे है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि अपराध के आंकड़ों की व्याख्या गलत तरीके से की जा रही है और पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।
कुल मिलाकर, रायपुर में बढ़ते अपराध के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, त्वरित न्याय और अपराध के मूल कारणों पर काम करना भी जरूरी है। महिला सुरक्षा, नशे पर नियंत्रण और युवा वर्ग में बढ़ती हिंसा को रोकना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
