छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को लेकर एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य में जल जीवन मिशन के तहत अब तक 41 लाख से अधिक घरेलू नल-कनेक्शन लगाए जा चुके हैं। सरकार के अनुसार, इस प्रगति के चलते 5,564 गांवों को ‘हर घर जल ग्राम’ घोषित किया गया है, जहां प्रत्येक घर में नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया गया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यह योजना राज्य के दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों तक पहुंची है, जहां पहले महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। नल-जल सुविधा मिलने से न सिर्फ समय और श्रम की बचत हुई है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ा है। स्वच्छ पानी उपलब्ध होने से जलजनित बीमारियों में कमी आने की बात कही जा रही है।
योजना के क्रियान्वयन में गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने बताया कि जहां भी निर्माण कार्य या पाइपलाइन बिछाने में लापरवाही, देरी या मानकों की अनदेखी पाई गई, वहां संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई। इसी क्रम में लापरवाह ठेकेदारों पर कुल ₹28.38 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है। कई मामलों में अनुबंध रद्द किए गए हैं और कुछ फर्मों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोका जा सके।
राज्य सरकार का कहना है कि केवल नल-कनेक्शन देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि नियमित, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके लिए जल स्रोतों की मैपिंग, पाइपलाइन नेटवर्क के रखरखाव और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है। जल परीक्षण प्रयोगशालाओं के जरिए सैंपल लेकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोगों तक सुरक्षित पानी पहुंचे।
अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में शेष बचे गांवों और घरों को भी इस योजना से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को पूरी तरह ‘हर घर जल’ राज्य बनाना है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बुनियादी सुविधाओं का अंतर कम किया जा सके।
