छत्तीसगढ़ के स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। हाल के दिनों में विदाई समारोह तथा अन्य स्कूल कार्यक्रमों के दौरान छात्रों द्वारा चलती गाड़ियों से बाहर निकलकर स्टंट करने, तेज रफ्तार में दोपहिया वाहन चलाने और अन्य जोखिम भरी गतिविधियों में शामिल होने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी विद्यालय में आयोजित होने वाले विदाई समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम या अन्य आयोजनों से पूर्व स्कूल प्रबंधन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा तथा कार्यक्रम के संचालन के लिए विस्तृत सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार करना होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि किशोरावस्था में उत्साह और रोमांच की भावना स्वाभाविक होती है, लेकिन इस उत्साह में किए गए खतरनाक कृत्य कभी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इससे न केवल विद्यार्थियों के जीवन पर खतरा मंडराता है, बल्कि उनके भविष्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13(1) के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि स्कूल परिसरों और कार्यक्रमों में अनुशासन तथा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विद्यालय में नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित प्रबंधन पर कार्रवाई भी की जा सकती है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना और स्कूलों में अनुशासित एवं जिम्मेदार माहौल बनाना है।
