सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा अभयारण्य अंतर्गत ग्राम रामटेक के 19 वर्षीय किसान अनिल पटेल ने पारंपरिक धान खेती से हटकर आधुनिक तकनीक आधारित सब्जी मॉडल विकसित कर मिसाल पेश की है। कम उम्र में ही उन्होंने फसल चयन, तकनीक और जल प्रबंधन को जोड़ते हुए ऐसा प्रयोग किया, जो आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। आमतौर पर तरबूज की खेती रेतीली जमीन में की जाती है, लेकिन अनिल ने सामान्य कृषि भूमि पर ड्रिप-मल्चिंग तकनीक अपनाकर तरबूज की सफल खेती कर नवाचार दिखाया।
अनिल ने तीन वर्ष पहले एक एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से शुरुआत की, जो सफल रही। इसके बाद अदरक, बैंगन, मिर्च और खीरा जैसी फसलों का उत्पादन किया। लगातार प्रयोग और आधुनिक पद्धतियों के उपयोग से उनकी आय तीन वर्षों में बढ़कर लगभग 15 लाख रुपए तक पहुंच गई। सफलता को देखते हुए उन्होंने सब्जी खेती का रकबा बढ़ाकर 5 एकड़ कर दिया, जिसमें 3 एकड़ में मिर्च, 1 एकड़ में खीरा और 1 एकड़ में तरबूज की खेती की जा रही है। साथ ही एक एकड़ में पॉलीहाउस भी स्थापित किया गया है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि हुई है।
ड्रिप-मल्चिंग तकनीक के उपयोग से खाद और पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे लागत कम होती है और उपज बेहतर मिलती है। अनुमान है कि एक एकड़ में तरबूज का उत्पादन 30 टन तक हो सकता है। गांव का वातावरण जंगलों से घिरा होने के कारण प्राकृतिक नमी बनी रहती है, वहीं खेत में बनाए गए तालाब और लगभग 70 फीट जलस्तर के कारण सालभर सिंचाई संभव हो पाती है। तालाब में मत्स्य पालन कर उन्होंने अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार किया, जिससे सालाना लगभग 40 हजार रुपए की आमदनी हो रही है।
