छत्तीसगढ़ में डिजिटल सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका की शुरुआत की। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने निवास कार्यालय में इस नई व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य किसानों और भूमिधारकों को उनकी भूमि संबंधी जानकारी सरल, पारदर्शी और त्वरित तरीके से उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और बैंक ऋण का लाभ लेने में आसानी होगी।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में ठोस प्रयास है। छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में लोग खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में भूमि अभिलेखों की सटीक और समय पर उपलब्धता किसानों के लिए अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल प्रणाली लागू होने से रिकॉर्ड में त्रुटियों की संभावना कम होगी और दस्तावेजों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
डिजिटल किसान किताब के माध्यम से किसान अब अपनी भूमि से जुड़ी जानकारी कहीं से भी ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेंगे। भू-अभिलेख पोर्टल पर बी-1 और पी-2 रिपोर्ट जैसी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध रहेंगी, जिससे बैंक लोन, फसल ऋण और अन्य सरकारी योजनाओं के आवेदन में सुविधा मिलेगी। साथ ही, दस्तावेजों के अपडेट अपने-आप होते रहने से बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम होगी।
इस पहल से प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सरल और प्रभावी होंगी तथा शासन और नागरिकों के बीच विश्वास मजबूत होगा। राजस्व विभाग, एनआईसी और तकनीकी टीम के सहयोग से तैयार यह डिजिटल व्यवस्था छत्तीसगढ़ को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। कुल मिलाकर, डिजिटल किसान किताब और ऋण पुस्तिका का शुभारंभ राज्य में राजस्व सुधार और डिजिटल नवाचार की दिशा में मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है।
