रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान खारून नदी में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का गंदा पानी मिलने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। इस विषय ने सदन में गंभीर चर्चा का माहौल बना दिया। भाजपा विधायक राजेश मूणत ने इस मामले को उठाते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा और कहा कि यह केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
विधायक मूणत ने आरोप लगाया कि खारून नदी में एसटीपी का अपशिष्ट जल मिल रहा है, जिसका सीधा असर रायपुर की जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने सदन में कहा कि इस नदी का पानी आम नागरिकों के साथ-साथ मंत्री और अधिकारी भी उपयोग करते हैं। ऐसे में यदि पानी प्रदूषित है तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से पूछा कि गंदे पानी की रोकथाम के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए क्या स्थायी समाधान तैयार किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदन में कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया। यह मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया। लगातार प्रदूषण से जल स्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बना रहता है, जिससे जलजनित बीमारियों की आशंका भी बढ़ सकती है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
खारून नदी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत मानी जाती है। ऐसे में इसमें प्रदूषित पानी का मिलना गंभीर चिंता का विषय है। यह प्रकरण इस बात की ओर संकेत करता है कि शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। आने वाले समय में सरकार की कार्रवाई और समिति की रिपोर्ट इस मुद्दे की दिशा तय करेगी।
