रायपुर। कभी संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नकारने वाले 120 सरेंडर नक्सली छत्तीसगढ़ विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बैठे नजर आए। तीन दिवसीय एक्सपोज़र टूर के तहत पहुंचे इन पूर्व नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही को करीब से देखा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझा।
इनमें 66 पुरुष और 54 महिलाएं शामिल थीं। कई ऐसे भी थे जिन पर कभी भारी इनाम घोषित था। विधानसभा भ्रमण के दौरान उन्होंने प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और विधायी कार्यवाही को देखा। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति विश्वास मजबूत करना था।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह पहल पुनर्वास नीति का हिस्सा है, जिसके तहत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्हें कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कुछ पूर्व नक्सलियों ने कहा कि वे पहले व्यवस्था को दूर से देखते थे और उस पर भरोसा नहीं था, लेकिन विधानसभा की कार्यवाही देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होती है। उन्होंने शांति और संवैधानिक रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।
राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक संदेश देगा और अन्य भटके युवाओं को भी हिंसा छोड़कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
