रायपुर/कबीरधाम। जंगलों से शहद इकट्ठा कर गांवों में बेचने वाली महिलाओं ने आज अपनी मेहनत से ‘बोड़ला हनी’ को नई पहचान दिलाई है। कबीरधाम जिले में तैयार होने वाला यह शहद अब देश के बड़े बाजारों के साथ विदेशों तक पहुंच रहा है।
महिला स्व-सहायता समूह आधुनिक मशीनों से शहद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर इसे बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में उतार रहे हैं। पहले महिलाओं को शहद का सही दाम नहीं मिलता था, लेकिन अब ‘बोड़ला हनी’ ब्रांड बनने से उनकी आय में बड़ा इजाफा हुआ है।
साल 2024-25 में ‘बोड़ला हनी’ की बिक्री एक करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंच गई। वन विभाग के सहयोग से सैकड़ों ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला है। अब इस शहद को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग की तैयारी भी की जा रही है।
