न्याय पाने की राह कभी आसान नहीं होती, लेकिन धैर्य और संघर्ष से हर मुश्किल जीती जा सकती है। जशपुर जिले की अमनेसिया टोप्पो ने इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है। 27 साल तक पति के इंतजार और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें न्यायालय से राहत मिली।
मुख्य घटना:
अमनेसिया टोप्पो के पति नजायियस टोप्पो सीआरपीएफ में जवान थे। उनकी शादी 1979 में हुई थी। 1998 में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर में हुई। मई 2000 में वे लंबी छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। उन्होंने पत्नी को पत्र लिखकर 15 मई को घर पहुंचने की बात कही थी। अमनेसिया उस दिन बस स्टैंड पर घंटों इंतजार करती रहीं, लेकिन पति लौटकर कभी नहीं आए।
संघर्ष की कहानी:
शुरुआत में अमनेसिया को लगा कि शायद छुट्टी रद्द हो गई होगी, लेकिन बाद में सीआरपीएफ के साथियों से खबर मिली कि पति घर नहीं पहुंचे। इसके बाद से उनका इंतजार और संघर्ष शुरू हुआ। साल दर साल पति की खोज और कानूनी लड़ाई चलती रही, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
न्याय की प्राप्ति:
आखिरकार 8 सितंबर 2025 को जिला न्यायालय ने उनके पति को ‘सिविल डेड’ घोषित कर दिया। इस फैसले के साथ ही अमनेसिया टोप्पो को पति की पैतृक संपत्ति पर पूर्ण कानूनी अधिकार भीमिल गया।
