छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गुरुवार को उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर सरकारी विमान से रायपुर पहुंचे। उनके आगमन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक वर्दीधारी पुलिस निरीक्षक जूते और टोपी उतारकर बाबा के पैर छूते हुए दिखाई दे रहा है। इस दृश्य ने न केवल प्रशासनिक मर्यादा, बल्कि सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर भी तीखी बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि बाबा बागेश्वर छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय विमान से रायपुर पहुंचे, जहां से वे भिलाई के लिए रवाना हुए। जानकारी के अनुसार, उन्हें लाने के लिए राज्य सरकार के एक मंत्री पहले उसी विमान से सतना गए थे और फिर बाबा को साथ लेकर रायपुर लौटे। वायरल वीडियो में तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं, जिससे राजनीतिक सवाल और गहराते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, भिलाई के जयंती स्टेडियम में 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा का आयोजन किया गया है। इसी धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए वे रायपुर और भिलाई पहुंचे थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या किसी निजी धार्मिक कार्यक्रम के लिए सरकारी विमान का उपयोग नियमों के अनुरूप है।
सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि बाबा बागेश्वर एक कथावाचक हैं और किसी भी संवैधानिक पद पर नहीं हैं। ऐसे में निजी धार्मिक आयोजन के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल सरकारी नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करार दिया है और प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की है।
विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। पुलिस निरीक्षक द्वारा सार्वजनिक रूप से पैर छूने की घटना को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि वर्दी में तैनात पुलिसकर्मी का इस तरह का आचरण पुलिस की गरिमा और सेवा नियमों के खिलाफ है। सोशल मीडिया पर निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की भी आवाजें उठ रही हैं।
सरकारी विमान के इस्तेमाल और पुलिसकर्मी के आचरण—इन दोनों ही मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज है। लोग यह सवाल कर रहे हैं कि क्या सरकारी पद, सरकारी संसाधन और वर्दी का उपयोग इस तरह निजी आस्था और धार्मिक आयोजनों के लिए किया जाना उचित है। फिलहाल, इस पूरे मामले पर न तो राज्य सरकार और न ही प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।
