काठमांडू| नेपाल की राजनीति ने शुक्रवार को नया इतिहास रच दिया। देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की अब नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन गईं। राष्ट्रपति रामेश्वर प्रसाद यादव ने उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।
बिना मंत्री के सरकार
सबसे खास बात यह है कि कार्की फिलहाल अकेले ही सरकार चलाएंगी। उन्होंने कोई मंत्री नियुक्त नहीं किया है। राष्ट्रपति ने साफ किया है कि यह सरकार सिर्फ अस्थायी रूप से 6 महीने तक काम करेगी, क्योंकि इतने समय के भीतर आम चुनाव कराए जाएंगे। यानी कार्की का कार्यकाल एक तरह से चुनाव तक का अंतरिम कार्यकाल माना जा रहा है।
राष्ट्रपति का संदेश
शपथ के बाद राष्ट्रपति यादव ने कहा,
देश को राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शिता की जरूरत है। इसके लिए जनता को मौका दिया जाएगा कि वे खुद अपनी सरकार चुनें।”
न्यायपालिका से प्रधानमंत्री तक का सफर
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सुशीला कार्की पहले नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी थीं।
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उन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के खिलाफ कड़े फैसले दिए थे।
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अब राजनीति में भी उन्हें एक ईमानदार और सख्त नेतृत्व के तौर पर देखा जा रहा है।
महिलाओं के लिए बड़ी उपलब्धि
नेपाल में महिलाओं की भागीदारी अब तक सीमित रही है। कार्की के पीएम बनने से इसे ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
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महिलाओं और युवाओं में उत्साह है।
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राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कार्की की नियुक्ति से देश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका मजबूत होगी।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत किया है लेकिन साथ ही शर्त भी रख दी—
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चुनाव पूरी तरह पारदर्शी हों।
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जनता की राय के मुताबिक सत्ता का हस्तांतरण हो।
