नई दिल्ली: मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार की सबसे पुरानी और लोकप्रिय परंपराओं में से एक है। इसका आरंभ 1957 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) द्वारा किया गया था। इसके बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी इसे अपनाया। निवेशक मानते हैं कि दिवाली के दिन किए गए निवेश से पूरे साल आर्थिक समृद्धि और भाग्यशाली लाभ मिलता है। नए निवेशक अक्सर अपनी पहली खरीदारी इस अवसर पर करते हैं, जबकि अनुभवी निवेशक इसे बाजार की शुभ शुरुआत के रूप में देखते हैं।इस दिन के ट्रेडिंग सत्र का सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व भी है, क्योंकि यह त्योहारों और निवेश की परंपरा का संगम है।
इस बार का समय और अवधि
- इस साल मुहूर्त ट्रेडिंग 21 अक्टूबर 2025 को आयोजित होगी।
- विवरण समय-मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र दोपहर 1:45 बजे से 2:45 बजे तक
- बाजार बंद होने का सामान्य समय शाम 3:30 बजे तक
- यह ट्रेडिंग केवल एक घंटे का विशेष सत्र होगा।
- सामान्य ट्रेडिंग घंटों से अलग, इस दौरान केवल चयनित स्टॉक्स पर ही कारोबार किया जाता है।
निवेशकों और बाजार पर असर
हर साल की तरह इस बार भी बड़े और छोटे निवेशक एक साथ भाग लेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की बढ़त देखने को मिल सकती है। यह सत्र नए निवेशकों के लिए पहला निवेश करने का अवसर भी प्रदान करता है।
मुहूर्त ट्रेडिंग की विशेषताएँ
1. शुभ समय में निवेश: निवेशकों को लगता है कि दिवाली के दिन किया गया निवेश पूरे साल लाभकारी रहेगा।
2. संस्कृति और परंपरा का संगम: केवल वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि यह आयोजन भारतीय बाजार की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी है।
3. विशेष सत्र का आयोजन: ट्रेडिंग के दौरान बाजार के प्रमुख स्टॉक्स पर ही लेन-देन होता है।
4. नए निवेशकों के लिए आदर्श: बहुत से निवेशक इस दिन पहली बार शेयर बाजार में कदम रखते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान सिर्फ प्रतिष्ठित और स्थिर स्टॉक्स में ही निवेश करें। छोटे निवेशकों को शुरुआत में कम राशि से शुरुआत करनी चाहिए। बाजार की अत्यधिक उम्मीद और भावनात्मक खरीदारी से बचना चाहिए।
