नई दिल्ली | दिल्ली सरकार के CM SHRI स्कूलों (Schools of Excellence) में दाखिले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अनोखी याचिका दाखिल हुई है। ये याचिका किसी बड़े नेता या संगठन की ओर से नहीं बल्कि महज़ 11 साल के छात्र जन्मेश सागर ने दायर की है।
बच्चे ने अपनी याचिका में साफ कहा है कि इन स्कूलों में एंट्रेंस एग्जाम लेना पूरी तरह से संविधान के अनुच्छेद 21(A) और शिक्षा का अधिकार कानून (RTE, 2009) के खिलाफ है
याचिका में क्या कहा गया?
शिक्षा का अधिकार (Right to Education Act) कहता है कि 6 से 14 साल तक हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है।
इस कानून के Section 13 के तहत किसी भी स्कूल को screening process या एंट्रेंस टेस्ट लेने की अनुमति नहीं है। दिल्ली सरकार ने 23 जुलाई 2025 को अधिसूचना जारी कर CM SHRI स्कूलों में एंट्रेंस टेस्ट अनिवार्य कर दिया था। छात्र का कहना है कि यह कदम पूरी तरह ग़ैरकानूनी और भेदभावपूर्ण है।
छात्र की मांग
1. CM SHRI स्कूलों में एंट्रेंस टेस्ट की व्यवस्था खत्म की जाए।
2. एडमिशन का तरीका सिर्फ और सिर्फ लॉटरी सिस्टम हो।
3. दिल्ली सरकार की 23 जुलाई की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट रद्द करे।
कानूनी तर्क
अनुच्छेद 21(A) : हर बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार।
RTE Act, Section 13 : किसी भी बच्चे का दाखिला screening test के आधार पर नहीं रोका जा सकता।याचिका का कहना है कि CM SHRI स्कूल भी RTE के दायरे में आते हैं, इसलिए उन्हें screening की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकार की संभावित दलीलें
सरकार कह सकती है कि CM SHRI स्कूल “specified category” में आते हैं और इन पर RTE की सभी शर्तें लागू नहीं होतीं। तर्क यह भी होगा कि इन स्कूलों को अकादमिक स्तर ऊँचा रखने के लिए योग्य बच्चों का चयन करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम होगा?
अगर सुप्रीम कोर्ट इस याचिका को सही मान लेता है—CM SHRI स्कूलों में एंट्रेंस टेस्ट खत्म होंगे। एडमिशन की प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम से होगी। इसका असर दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर के उन सरकारी स्कूलों पर भी पड़ेगा, जो एंट्रेंस टेस्ट लेते हैं।
अगर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी—
मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा। CM SHRI स्कूलों में दाखिले सिर्फ एंट्रेंस एग्जाम पास करने वालों को ही मिलेंगे।
