छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग के नाम पर चल रहा घोटाला अब एक संगठित भ्रष्टाचार के नेटवर्क के रूप में सामने आ चुका है। इस स्कैम में राइस मिलर्स, अधिकारी और एसोसिएशन के पदाधिकारी मिलकर 140 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली करने में शामिल रहे। सरकारी योजनाओं के नाम पर किसानों का हक छीना गया और नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम खेल खेला गया।
1. घोटाले की जड़ें और नेटवर्क
कस्टम मिलिंग योजना में सरकार किसानों से धान खरीदकर उसे मिलर्स से चावल में बदलवाती है। जांच में सामने आया कि इसी प्रक्रिया को कमाई का जरिया बना लिया गया।
करीब 2700 राइस मिलर्स से अवैध वसूली की गई।
बिल पास कराने के लिए कमीशन तय हुआ।
मिलर्स को धमकाकर और भुगतान रोककर पैसा वसूला गया।
यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं था, बल्कि एक योजनाबद्ध तंत्र बनाकर हर स्तर पर वसूली की गई।
2. चार्जशीट में बड़े नाम
जांच एजेंसियों ने इस घोटाले की गहराई में जाकर जांच की और 3500 पेज की चार्जशीट अदालत में पेश की।
इसमें कई अधिकारियों और बड़े नामों का जिक्र है।
पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और व्यवसायी अनवर ढेबर पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की गई।
टुटेजा पर करीब 20 करोड़ रुपये की वसूली के आरोप हैं।
मिलर्स पर दबाव डाला गया कि अगर कमीशन नहीं दिया तो भुगतान रोक दिया जाएगा।
3. मिलर्स की भूमिका — मुनाफे का गणित
मिलर्स ने इस पूरी प्रक्रिया में न सिर्फ सहयोग किया बल्कि सक्रिय भूमिका निभाई।
अधिकारियों को कमीशन देकर बिल पास कराए गए।
धान की गुणवत्ता में हेराफेरी की गई।
सरकारी रिकॉर्ड में फेरबदल कर मुनाफा बढ़ाया गया।
यह एक ऐसा नेटवर्क था जिसमें हर कड़ी पर पैसा घूम रहा था और ऊपर तक पहुंच रहा था।
