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October 26, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

प्रस्तावित खदान के खिलाफ उबाल: 50 गाँवों के 1000 से अधिक ग्रामीण दुर्ग पहुँचे, EIA रिपोर्ट को बताया त्रुटिपूर्ण

दुर्ग-भिलाई। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई क्षेत्र में प्रस्तावित सीमेंट खदान परियोजना को लेकर शुक्रवार को भारी विरोध सामने आया। पंडरिया, विचारपुर, बुँदेली, भरदागोंड़, संडी सहित 50 से अधिक गाँवों से करीब 1000 ग्रामीण—जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ, किसान और वरिष्ठ नागरिक शामिल थे—छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग पहुँचे।

ग्रामीणों ने 11 दिसंबर को निर्धारित जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने की मांग कर जोरदार प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि कंपनी द्वारा तैयार की गई पर्यावरण प्रभाव आंकलन (EIA) रिपोर्ट जानबूझकर अंग्रेज़ी में और केवल 10 पृष्ठों में दी गई है, जिससे स्थानीय लोग जानकारी समझ न सकें और आपत्ति दर्ज न करा पाएँ।

ग्रामीणों ने चेताया कि प्रस्तावित सीमेंट प्लांट और लाइमस्टोन खदान ‘लाल श्रेणी’ के उच्च जोखिम वाले उद्योग हैं। उनका कहना है कि परियोजना से खेती, जलस्रोत, स्वास्थ्य और पूरे पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

पूर्व विधायक गिरवर जंघेल भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि जिस स्थान पर खदान प्रस्तावित है, वहाँ घनी आबादी और अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि मौजूद है। उनका कहना है कि यदि खदान शुरू हुई तो हजारों परिवार प्रभावित होंगे।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि 404 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली परियोजना में भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और मुआवज़े का स्पष्ट विवरण EIA रिपोर्ट में शामिल नहीं है। 10 किमी अध्ययन क्षेत्र की कई बस्तियों को रिपोर्ट से बाहर छोड़ा गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि 13 प्रमुख जलस्रोत—नदियाँ, नाले, झरने और भूजल—प्रभावित होंगे, लेकिन कंपनी ने अपने आंकलन में इन्हें नजरअंदाज किया है। साथ ही खदान संचालन से बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक के प्रभावों का भी कोई सर्वे रिपोर्ट में शामिल नहीं है।

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