रायपुर। निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी Soumya Chaurasia पर आय से 1872% अधिक अवैध संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप लगा है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मामले की गहन जांच के बाद आज कोर्ट में करीब 8000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। यह मामला प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण माना जा रहा है।
अभियोजन पत्र के अनुसार सौम्या चौरसिया ने अपने परिवार और अन्य व्यक्तियों के नाम पर लगभग 45 अचल संपत्तियों में बेनामी निवेश किया। जांच में यह भी सामने आया कि उन्होंने अपने पद पर रहते हुए करीब ₹49,69,48,298 (उनचास करोड़ उनहत्तर लाख अड़तालीस हजार दो सौ अट्ठानवे रुपये) की अवैध कमाई की है।
गौरतलब है कि 2008 बैच की अधिकारी सौम्या चौरसिया की पहली पोस्टिंग बिलासपुर जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुई थी। इसके पहले वे वर्ष 2005 में लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। वर्ष 2019 में उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया गया। 17 वर्षों के सेवाकाल में उनकी और परिवार की वैध आय लगभग ₹2.51 करोड़ पाई गई।
इसके बावजूद उन्होंने अवैध रूप से लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी की। जांच में यह भी साफ हुआ कि सबसे अधिक निवेश 2019 से 2022 के बीच हुआ। इस मामले में ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।
इस कार्रवाई को प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्यवाही माना जा रहा है। राज्य में यह आय से अधिक संपत्ति का अब तक का सबसे बड़ा मामला है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।
