छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग Chhattisgarh Public Service Commission (CGPSC) की 24वीं वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश की जाएगी। इस रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में पहले से ही हलचल तेज है। पिछले कुछ वर्षों में आयोग की परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लगातार चर्चा में रहे हैं। परिणामों में बदलाव, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में त्रुटियाँ, चयन सूची में संशोधन और पारदर्शिता को लेकर उठते सवालों ने इस रिपोर्ट को और संवेदनशील बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में चयन प्रक्रियाओं में हुई गड़बड़ियों का विस्तृत उल्लेख हो सकता है। खासतौर पर राज्य प्रशासनिक सेवा (RAS) और डिप्टी कलेक्टर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर कथित अनियमित नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। चूंकि इस समय सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियां आयोग की परीक्षाओं की जांच कर रही हैं, ऐसे में रिपोर्ट पेश होते ही सियासी माहौल गर्माने की संभावना है।
रिपोर्ट में परीक्षा प्रणाली को और पारदर्शी व फूलप्रूफ बनाने के सुझाव भी शामिल किए गए हैं। तकनीकी सुधार, डिजिटल निगरानी और शिकायत निवारण प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। वहीं, विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकों का पूरा विवरण भी रिपोर्ट में दर्ज किया गया है, जिसमें लंबित मामलों के निस्तारण की जानकारी दी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रिपोर्ट पेश होने के बाद यह मुद्दा न केवल विधानसभा बल्कि राज्य की राजनीति में भी बहस का केंद्र बन सकता है। पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठने वाले सवाल प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।
