कोरबा जिले में वन अधिकार पत्र को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। रामपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों किसानों ने मंगलवार को SDM कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसान लंबे समय से लंबित वन अधिकार पत्र जारी न होने से नाराज थे और उन्होंने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार आवेदन और शिकायतें कीं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शन में शामिल अधिकांश किसान पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड से पहुंचे थे, जिनका आरोप है कि वे पिछले कई पीढ़ियों से जिस भूमि पर निवास कर खेती-किसानी कर रहे हैं, उस पर आज तक उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत वैधानिक अधिकार पत्र नहीं मिला है।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने फर्जी वन अधिकार पत्र बनाए जाने और अवैध वसूली के आरोप भी लगाए। किसानों का कहना है कि कुछ मामलों में पैसे लेकर फर्जी तरीके से पट्टे तैयार किए गए, जबकि वास्तविक पात्र किसानों को इसका लाभ नहीं मिला। एक ग्रामीण ने बताया कि उससे पट्टा बनवाने के नाम पर पैसे लिए गए, लेकिन बाद में पता चला कि दिया गया दस्तावेज फर्जी है। किसानों ने ऐसे मामलों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस प्रदर्शन को सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिला। समाजसेवी और एकता परिषद के कार्यकर्ताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में आदिवासियों और किसानों को वन अधिकार कानून के तहत उनका हक दिलाने की लड़ाई चल रही है। 13 दिसंबर 2005 के कानून के अनुसार, जो भी आदिवासी या वनवासी जिस भूमि पर निवास कर रहा है, उसे अधिकार पत्र मिलना चाहिए।
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही SDM सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। पोड़ी उपरोड़ा के SDM मनोज कुमार ने कहा कि किसानों की शिकायतों में यदि पट्टे के बदले पैसे मांगने या फर्जी दस्तावेज बनाए जाने की बात सामने आती है, तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद किसानों ने प्रदर्शन समाप्त किया, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही वास्तविक पात्र किसानों को वन अधिकार पत्र नहीं मिले, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
