July 23, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

कोरबा वनमंडल में कूप कटिंग को लेकर ग्रामीणों का उग्र विरोध, डीएफओ कार्यालय में हंगामा; 50 ग्रामीणों पर केस दर्ज

कोरबा वनमंडल अंतर्गत पसरखेत वन परिक्षेत्र में ‘सिलेक्शन कम इम्प्रूवमेंट’ योजना के तहत चल रहे कूप कटिंग कार्य को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। कोलगा गांव सहित आसपास के गुफा एरिया, बांधा पतरा, ढोंढीटिकरा और मोहनपुर गांवों में मजदूरों के माध्यम से किए जा रहे पेड़ों की कटाई के खिलाफ ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कूप कटिंग से उनके आजीविका संसाधन और जंगल आधारित जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर सिविल लाइन थाना पुलिस के साथ मानिकपुर और कोतवाली थाना पुलिस भी पहुंची। पुलिस बल द्वारा ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन आक्रोश शांत नहीं हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कूप कटिंग कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण कोरबा वनमंडल कार्यालय (डीएफओ कार्यालय) पहुंच गए, जहां भारी भीड़ को देखते हुए कार्यालय का मुख्य द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि कूप कटिंग के दौरान हुई एक घटना के बाद उनके खिलाफ करतला थाना में फर्जी मामले दर्ज किए गए हैं। ग्रामीण दीप्ति खजूर ने कहा कि घटना के समय कई लोग अपने घरों में थे, जबकि कुछ अस्पताल में भर्ती थे, इसके बावजूद उन्हें आरोपी बनाया गया। वहीं ग्रामीण बरातु बाई ने कहा कि यह आदिवासी क्षेत्र है और यहां के लोग पूरी तरह जंगल पर निर्भर हैं। यदि जंगल में कटाई जारी रही तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

स्थानीय जनप्रतिनिधि अभिमन्यु रतिया ने बताया कि कूप कटिंग का विरोध पहले भी किया गया था और अब भी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ग्रामीणों की मांगों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक कूप कटिंग का कार्य बंद रहना चाहिए। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कूप कटिंग के दौरान उन्होंने वन कर्मियों के कुछ औजार जब्त किए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में करतला थाना क्षेत्र में लगभग 50 ग्रामीणों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। हाल ही में आसपास के छह गांवों के ग्रामीणों ने बैठक कर एकजुट आंदोलन का निर्णय लिया था, जिसके बाद विरोध और तेज हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सिविल लाइन थाना पुलिस और वन विभाग के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर रखे हुए हैं।

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