बिलासपुर। शहर के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित मित्तल फर्नीचर फैक्ट्री में हुआ भीषण अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि औद्योगिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। इस हादसे में दो कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री परिसर में बिना किसी वैध अनुमति के लगभग 10 हजार लीटर तारपीन तेल का भंडारण किया गया था। तारपीन अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है और इसकी इतनी बड़ी मात्रा में मौजूदगी ने आग को कुछ ही मिनटों में भयावह रूप दे दिया। आग लगते ही फैक्ट्री का पूरा शेड धुएं और लपटों से भर गया, जिससे अंदर काम कर रहे कर्मचारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
जांच अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री प्रबंधन ने फायर-सेफ्टी से जुड़े दस्तावेज तो तैयार कर रखे थे, लेकिन जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजाम न के बराबर थे। न पर्याप्त अग्निशमन यंत्र मौजूद थे, न आपातकालीन निकास मार्ग स्पष्ट थे और न ही कर्मचारियों को आग जैसी स्थिति से निपटने का कोई प्रशिक्षण दिया गया था। यही कारण रहा कि आग फैलते ही हालात बेकाबू हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग इतनी विकराल थी कि उस पर काबू पाने में घंटों लग गए। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया, लेकिन तब तक दो कर्मचारियों की जान जा चुकी थी। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिजनों को सूचना दी।
इस हादसे के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। अधिकारियों ने न केवल मित्तल फर्नीचर फैक्ट्री के खिलाफ जांच तेज कर दी है, बल्कि जिले की अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी फायर-सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन और लापरवाही साबित होती है, तो फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मित्तल फर्नीचर अग्निकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या औद्योगिक सुरक्षा नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। दो जिंदगियों की कीमत पर सामने आई यह सच्चाई प्रशासन और उद्योग जगत दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
