April 17, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

भारत-माला भूमि अधिग्रहण घोटाला: छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, रायपुर–महासमुंद समेत 9 ठिकानों पर

भारत माला परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ में हुए कथित भूमि अधिग्रहण घोटाले ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में रायपुर और महासमुंद जिले समेत राज्य के कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा वितरण में हुई कथित अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन को लेकर की गई है।

जानकारी के अनुसार, रायपुर में हरमीत सिंह खनूजा के निवास पर ED की टीम ने दबिश दी, जबकि महासमुंद जिले के मेघा बसंत क्षेत्र में व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के घर पर भी छापा मारा गया। दोनों स्थानों पर सुबह करीब 6 बजे से जांच कार्रवाई जारी रही। छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

यह मामला भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापत्तनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। आरोप है कि जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर रिकॉर्ड में कई नए नाम जोड़े गए, जिससे मुआवजा राशि को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया। जमीन के वास्तविक मूल्य की तुलना में कहीं अधिक राशि का भुगतान दिखाकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

राजस्व विभाग की जांच में सामने आया कि अभनपुर क्षेत्र के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया, कुछ राजस्व अधिकारियों और अन्य सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन को 159 खसरों में बांटा गया और मुआवजे के लिए करीब 80 नए नाम रिकॉर्ड में दर्ज किए गए। इससे करीब 559 मीटर जमीन की कीमत 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ रुपये से अधिक दिखाई गई।

इस प्रकरण में पहले ही प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है। दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर प्रकाशित होने के बाद कोरबा जिले के तत्कालीन कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को निलंबित किया गया था। इससे पहले जगदलपुर नगर निगम आयुक्त निर्भय साहू को भी सस्पेंड किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट तैयार होने के लगभग छह महीने बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई गई, जिसमें निर्भय साहू समेत 5 अधिकारियों-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक की गड़बड़ी का आरोप है।

ED की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि मुआवजा राशि कहां-कहां ट्रांसफर हुई, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और अवैध रूप से अर्जित धन को कैसे ठिकाने लगाया गया। एजेंसी को आशंका है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट के जरिए अंजाम दिया गया आर्थिक अपराध है।

फिलहाल, छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे होने तथा नई गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

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