मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों की घटना के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। शहर के कई इलाकों में पेयजल की पाइपलाइनें सीधे नालों के बीच से गुजर रही हैं, जिससे गंदे पानी के सप्लाई लाइन में मिलने का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर पुरानी पाइपलाइनें टूट चुकी हैं, जिससे दूषित पानी के रिसाव की आशंका और गहरी हो गई है।
जांच में सामने आया कि मोवा, सड्डू और जोरा जैसे इलाकों में नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार सप्लाई बंद होने और फिर अचानक पानी आने से गंदगी पाइपलाइन में खिंच जाती है, जिससे रोजमर्रा की परेशानियों के साथ स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
इंदौर हादसे के बाद रायपुर प्रशासन सतर्क हुआ है। महापौर और नगर निगम आयुक्त ने अलग-अलग इलाकों का निरीक्षण कर नालों की सफाई, एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पर फोकस और पाइपलाइनों की मरम्मत के निर्देश दिए हैं। सरोना डंपिंग यार्ड और प्रमुख नालों के आसपास सरकारी जमीन के सीमांकन के साथ जनहित के कार्यों की योजना बनाने की बात भी कही गई है। साथ ही गंदे पानी को सीधे एसटीपी तक पहुंचाकर उसके ट्रीटमेंट और उपचारित पानी के पुनः उपयोग पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी हर साल बरसात के मौसम में पीलिया-डायरिया की वजह बनता है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्षों में इन बीमारियों के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं और 2025 की शुरुआत में भी कुछ इलाकों में संक्रमण के संकेत मिले हैं। नगर निगम ने शिकायतों के लिए टोल-फ्री नंबर जारी किया है, लेकिन लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी समाधान में देरी होती है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि रायपुर की कई मुख्य पाइपलाइनें 30–40 साल पुरानी हैं। ज्यादा प्रेशर पड़ते ही ये फट जाती हैं, जिससे लाखों लीटर पानी बर्बाद होने के साथ-साथ गंदा पानी सप्लाई में मिल जाता है। यह स्थिति केवल जल प्रबंधन की नहीं, बल्कि सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या बन चुकी है। समय रहते स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
