छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार इन दिनों छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। अपने प्रवास के दौरान वे सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कन्हैया कुमार ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, सामाजिक माहौल और हिंसा की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का विचार था कि वैष्णव वही है, जो दूसरों की पीड़ा में दुखी हो। लेकिन आज समाज की स्थिति इसके विपरीत होती जा रही है, जहां कई बार लोगों को दूसरों की पीड़ा में खुशी मिलती दिखाई देती है। कन्हैया कुमार ने चिंता जताते हुए कहा कि आज की राजनीति नफरत की राजनीति बन चुकी है और जब धर्म व नफरत के नाम पर राजनीति होने लगे, तब गांधी को बार-बार याद करने की जरूरत और भी अधिक हो जाती है।
उन्होंने भाजपा और उसके समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस देश का इतिहास सभी का साझा इतिहास है। भारत का इतिहास हिंसा और असत्य का नहीं, बल्कि सत्य और अहिंसा का इतिहास रहा है। इसलिए देश को उसी रास्ते पर चलने की आवश्यकता है, जिस रास्ते पर महात्मा गांधी ने चलकर दुनिया को शांति और मानवता का संदेश दिया।
नक्सलवाद के मुद्दे पर बोलते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि हिंसा किसी भी रूप में सही नहीं है। चाहे कोई भी करे, हिंसा से मानवता को नुकसान ही पहुंचता है। सरकार द्वारा नक्सलवाद को खत्म करने के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि हिंसा समाप्त होती है तो यह अच्छी बात है, लेकिन सबसे जरूरी है कि हिंसा जितनी जल्दी खत्म हो, उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस बंदूकवादी विचारधारा के खिलाफ है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बांग्लादेशी हिंदुओं को मकान देने के बयान पर तंज कसते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि लोगों को रहने के लिए जगह मिलना अच्छी बात है, लेकिन देश में रहने वाले कई हिंदुओं को आज तक पक्का मकान नहीं मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री के पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा कि 2022 तक सभी को पक्का मकान देने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
कन्हैया कुमार ने अपने वक्तव्य के अंत में कहा कि महात्मा गांधी का बलिदान दिवस सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का दिन है। छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आकर गांधी के विचारों को याद करना और उन्हें जीवन में उतारना ही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
