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September 10, 2026
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मासूम की दरिंदगी पर न्याय का कठोर फैसला: दोषी को फांसी, कोर्ट बोली– समाज की आत्मा को झकझोरने वाला अपराध

शहडोल : मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने दोषी को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध न केवल अमानवीय है, बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में आता है और इसमें किसी भी तरह की नरमी न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगी।

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी ने जिस क्रूरता और बर्बरता के साथ वारदात को अंजाम दिया, वह 2012 के निर्भया कांड की याद दिलाती है। पीड़िता की कम उम्र, अपराध की योजना, दुष्कर्म के बाद हत्या और सबूत मिटाने की कोशिश जैसे पहलुओं ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बना दिया।
अदालत ने कहा कि यदि ऐसे अपराधों में कठोरतम सजा नहीं दी गई, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा।

सबूतों के आधार पर दोष सिद्ध

कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपी का अपराध पूरी तरह सिद्ध किया। बचाव पक्ष की दलीलों को अदालत ने असंगत और तथ्यों के विपरीत बताया।

आजन्म कारावास को बताया अपर्याप्त

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में आजीवन कारावास जैसी सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप नहीं है। अपराध की प्रकृति इतनी घृणित और भयावह है कि केवल मृत्युदंड ही न्याय और समाज की अपेक्षाओं को पूरा कर सकता है।

पीड़ित परिवार को मिला न्याय का भरोसा

फैसले के बाद पीड़िता के परिजनों ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उनकी बच्ची को तो वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन यह फैसला भविष्य में ऐसे अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश देगा।

समाज के लिए चेतावनी

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बच्चों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर न्यायपालिका का सख्त रुख दर्शाता है। ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और कठोर सजा समाज में कानून का भय बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

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