चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से एक नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत अब बुर्का या घूंघट पहनकर मतदान केंद्र पर आने वाली महिलाओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर एक आंगनबाड़ी सेविका मौजूद रहेगी। यह सेविका उन महिलाओं की पहचान करेगी जिनका चेहरा ढंका हुआ होता है, ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और फर्जीवाड़े से मुक्त रहे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि यह कदम मतदान से पहले मतदाताओं की सही पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। बिहार चुनाव से इस नई व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी, जहां इसे सभी 90,712 मतदान केंद्रों पर लागू करने का निर्णय लिया गया है। इन केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ी सेविकाएं स्थानीय क्षेत्र की होंगी, जिससे उन्हें वहां की महिलाओं की पहचान में आसानी होगी।
यदि किसी महिला की पहचान को लेकर संदेह होता है, तो सेविका उचित जांच के बाद ही उसे मतदान की अनुमति देगी। यह कदम न केवल महिलाओं की गरिमा और गोपनीयता की रक्षा करेगा, बल्कि फर्जी मतदान की संभावनाओं पर भी रोक लगाएगा।
इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा बुर्का और घूंघट में आने वाली महिलाओं की पहचान को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब इस नई व्यवस्था से यह समस्या दूर हो जाएगी और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी।
चुनाव आयोग का मानना है कि यह प्रणाली भविष्य में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों में भी लागू की जा सकती है। साथ ही, आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 भी जारी किया है, जिस पर कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत या सुझाव दर्ज करा सकता है।
यह नई पहल न केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगी, बल्कि महिला मतदाताओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगी।
