July 31, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष: 46 शेल्टर होम में 4,160 आवारा मवेशी, 36 गौधामों को मिली प्रशासनिक मंजूरी

छत्तीसगढ़ में सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशियों से हो रहे सड़क हादसों और किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। इस मुद्दे पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शासन ने शपथपत्र के माध्यम से बताया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में फिलहाल 46 अस्थायी मवेशी शेल्टर होम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें कुल 4,160 आवारा मवेशियों को सुरक्षित रखा गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आवारा पशुओं के स्थायी समाधान के लिए 36 गौधामों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 मवेशियों को रखने की क्षमता होगी। इन गौधामों में पशुओं के लिए शेड, पेयजल, बिजली और चारे जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्तमान में तीन गौधाम पूरी तरह संचालित हो चुके हैं, जबकि आठ अन्य गौधामों में मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं का कार्य प्रगति पर है।

राज्य सरकार ने बताया कि इन गौधामों का संचालन स्व-सहायता समूहों, गौशाला समितियों और किसानों के समूहों के माध्यम से किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो और पशुओं की बेहतर देखरेख सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही पशु चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से गौधामों और शेल्टर होम का निरीक्षण करें। पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और चारा-पानी की स्थिति की मासिक रिपोर्ट भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाएगी।

शासन ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में गृह विभाग, नगरीय निकाय, एनएचएआई और सड़क सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है, ताकि सड़कों पर आवारा मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। इसके लिए निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है तथा एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की गई है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल शामिल हैं, ने शासन के जवाब के बाद इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई की तारीख 23 मार्च तय की है। कोर्ट अब यह देखेगा कि सरकार द्वारा किए गए दावे जमीनी स्तर पर किस हद तक लागू हो रहे हैं और आवारा पशुओं की समस्या से आम लोगों को वास्तविक राहत मिल पा रही है या नहीं।

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