April 18, 2026
The Defence
छत्तीसगढ़

रायपुर में रसोइयों का आंदोलन बना जानलेवा: दो महिला कर्मियों की मौत से भड़का आक्रोश, सरकार पर अनदेखी का आरोप

राजधानी रायपुर में मिड-डे मील योजना के तहत कार्यरत रसोइयों का आंदोलन अब एक गंभीर मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है। न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर 29 दिसंबर 2025 से नव रायपुर में जारी धरने के दौरान दो महिला रसोइयों की मौत हो गई, जिससे प्रदेशभर में आक्रोश का माहौल है।

बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के सालधा गांव स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल में पदस्थ रसोइया दुलारी यादव आंदोलन स्थल पर बैठी थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। पहले उन्हें अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, बाद में रायपुर के डॉ. बीआर अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल में रेफर किया गया। हालत गंभीर होने पर निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

दूसरी ओर, बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के कुसुमकसा गांव की निवासी रुक्मणी सिन्हा, जो मिड-डे मील योजना में रसोइया के रूप में कार्यरत थीं, आंदोलन के दौरान बीमार पड़ीं। उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी भी मौत हो गई। दोनों महिलाएं छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले चल रहे आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थीं।

यूनियन का आरोप है कि प्रदेशभर में लगभग 86,000 रसोइया कर्मी, जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं, लंबे समय से न्यूनतम मानदेय, स्थायी नौकरी, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य स्थितियों की मांग कर रही हैं। वर्तमान में उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मानदेय दिया जा रहा है, जो कलेक्टर दर से भी कम है।

आंदोलनकारी रसोइयों की मांगों में मानदेय बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन करना, 50% मानदेय वृद्धि का सरकारी वादा पूरा करना, ड्रेस कोड लागू करना, बजट में रसोइया संघ की मांगों को शामिल करना, बिना कारण नौकरी से न निकाले जाने की गारंटी, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।

दो महिला रसोइयों की मौत के बाद आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है। यूनियन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। रसोइया संघ ने मृतक कर्मियों के परिजनों को मुआवजा देने और मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।

यह आंदोलन अब सिर्फ मजदूरी का मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

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