खैरागढ़ जिले के कलेक्टोरेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक अधेड़ व्यक्ति ने कथित रूप से अपने ऊपर मिट्टी तेल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। घटना दिन के समय हुई, जब परिसर में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक मौजूद थे। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और लोग इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार व्यक्ति ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के यह कदम उठाया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई।
हालांकि, वहां तैनात पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों ने तुरंत सतर्कता दिखाते हुए हस्तक्षेप किया और उसे आग लगाने से रोक लिया। समय पर की गई इस कार्रवाई के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। इस दौरान व्यक्ति को हल्की चोटें आईं, लेकिन उसकी जान बच गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने उसे अपनी सुरक्षा में लेकर वाहन से अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को फिलहाल स्थिर बताया है और उसे खतरे से बाहर माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसके गांव में कुछ लोगों द्वारा उसका सामाजिक बहिष्कार किया गया था। उसने इस संबंध में पहले भी प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों में शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उसे कोई ठोस समाधान या न्याय नहीं मिल पाया। लगातार उपेक्षा और अनदेखी के कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुका था। इसी तनाव और निराशा के चलते उसने कलेक्टोरेट परिसर में यह खतरनाक कदम उठाने की कोशिश की।
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां पुलिस की तत्परता से एक जान बच गई, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट हुआ कि यदि समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होती, तो शायद ऐसी नौबत ही नहीं आती। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पीड़ित के आरोपों की सत्यता को परखा जा रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
